मम्मी - पापा : इन महान चरित्रों के

मम्मी – पापा : इन महान चरित्रों के समक्ष मेरे शब्दों की क्या बिसात

दिनभर कड़े शिक्षक बन बहुत कुछ पढाया – सिखाया,

शाम को बाजारों के मेले में खिलौनों से खिलवाया,

रात को पंखे झल, सर पे थपकी दे देकर सुलाया,

हर दर्द, हर गम में पुचकारा – सहलाया,

हमारी जरूरते पूरी करने को अपना पसीना बहाया||

मेरे सामने पकवान लगाने को खुद की भूख भी भुला दी,

मेरे नए कपड़ो से ही कई बार उन्होंने भी संतुष्टि पा ली,

सद आचरण की मिसाल रख दी हम सब के सामने,

सादा जीवन उच्च विचार की प्रस्तुति उन्हीं से आई,

कुछ कर गुजरने की ख्वाहिश और जिद की राह भी उन्होंने ही दिखलाई||

माता पिता, अग्रजनो की सेवा का भाव भी सिखा,

छोटों को स्नेह, सम्मान दे प्रोत्साहित करने का जज्बा भी देखा,

निःस्वार्थ भाव से नेकी, सहयोग करना उनको देख हुआ चरितार्थ,

खुद से चलना, गिर कर उठना, चलते रहना का अर्थ,

किया बहुत कुछ आत्मसात है, और सीखने की है आस||

मेरे चेहरे के भावों को पढ़ ख़ुशी- दर्द जानने की कला,

जरुरत पड़ने पर नरम या कठोर बनने का सिलसिला,

इन महान चरित्रों के समक्ष, मेरे शब्दों की क्या बिसात,

ये भी उन्हीं की देन हैं, वरना मेरी क्या थी औकात,

भगवान् उन्हें ताउम्र दे ख़ुशी, सुलझा जीवन और असीम प्यार||

अर्चना

 

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