आओ नेताओ की योग्यता बढाये !!

            वो जमाने लद चुके जब लोग जन्नत की आस में अपने जीवन में कुछ उपकारी कार्य कर लिया करते थे। आज-कल लोग धरती में ही जन्नत पाना चाहते हैं। आज जन्नत का मतलब बहुत आसानी से बहुत सारा पैसे कमाने से हैं, फिर चाहे वो काम कैसा भी हो। तो मरणोपरांत जन्नत की किसे चिंता? जब चिंता नहीं तो क्या परोपकार ? आज हर कोई फटाफट पैसा कमाना चाहता हैं, नेता घोटालों पे घोटाले कर रहे हैं, खिलाड़ी मैच फ़िक्स कर रहे हैं, बेटा बाप को मार रहा हैं, नेता विकलांगों की कागज़ी योजना का पैसा तक खा जाते हैं, टैक्स का पैसा नेता आपस में बाँट डकारने में लगे हैं। नैतिकता का अर्थ लोग भूल चुके हैं। न्यूज़ चैनलों में कोई अच्छी खबर सालों से नहीं सुनी। ऐसा लगता हैं जैसे देश में घोटालों, बलात्कार और क्रिकेट के अलावा कुछ होता ही नहीं हैं।
            ये कहना गलत नहीं होगा कि देश में कोई ऐसी योजना नहीं हैं, जिसमें भ्रस्टाचार न हुआ हो। आम आदमी तक शायद ही 1% पैसा पहुंचता हो। जब तक नेता उचित उदाहरण पेश नहीं करते तब तक देश के हालात नहीं सुधर सकते। अब एक ही विकल्प शेष हैं या तो नेता स्वयं सुधरे या जनता उन्हें सुधारने का बीड़ा उठाये। क्यों ऐसा हैं कि राजनीतिक पार्टियों का उत्तराधिकारी नेता प्रमुख का बेटा या रिश्तेवाला ही बनता हैं? क्या इसे लोकतंत्र कहते हैं तो राजतन्त्र क्या था ?
            हमे ज़रुरत हैं तो देश को 100% शिक्षित करने की ताकि गाँव हो या शहर, लोग जागरूक बने और नैतिक मूल्यों की महत्ता को समझे। हर कोई कहता हैं कि शिक्षा ही एक ऐसा अनमोल अमृत हैं जो चरित्र-निर्माण और भारत-निर्माण में सहायक हैं, शिक्षा ही समाज की हर बुराई को मिटा सकती हैं। पर ये तब तक नहीं हो सकता जब तक देश के नेताओं की योग्यता का स्तर उच्च न किया जाए । कहते हैं न ‘जैसा राजा, वैसी प्रजा’।
          आज देश बीमार हैं उसे भ्रस्ट नेता नामक कीटाणु कमज़ोर बना रहे हैं, अशिक्षा रूपी गंदगी विकास की डोर को रोके हैं। शिक्षित युवा ही देश को नयी दिशा दे सकता हैं। पर क्या देश का संसदीय ढाँचा शिक्षा के विस्तार के लिए तैयार हैं? मुझे नहीं लगता देश में शिक्षा का स्तर बुनियादी तौर पर सुधरा हैं। अब आपको बताता हूँ वो कैसे ?
               ये विचित्र हैं कि विश्व के सबसे बड़े प्रजातंत्र में देश को चलाने वालो नेताओं को चुनने  के लिए किसी शैक्षिक योग्यता की ज़रुरत ही नहीं हैं, वो भी तब जब हर छोटे से पद को पूर्ण करने के लिए परिक्षाओं की सीरिज़ आयोजित होती हैं। स्कूलों में चपरासी चुनने के लिए भी शैक्षिक योग्यता वर्णित हैं और चयन के लिए परीक्षा भी आयोजित की जाती हैं परन्तु संसद का सदस्य बनने के लिए कम से कम योग्यता हैं :- व्यक्ति भारत देश का नागरिक हो और उम्र कम से कम 25 साल हो।
           ये हास्यपद हैं कि संविधान में नेता बनने के लिए कोई शैक्षिक योग्यता निर्धारित नहीं की गयी हैं। आप किसी अनपढ़, अपराधी और अयोग्य व्यक्ति को कैसे देश की बागड़ोर दे सकते हैं? क्या ये हमारी संसदीय व्यवस्था की असफ़लता नहीं हैं? ऐसे व्यक्ति पर आप कैसे भरोसा कर  सकते हैं जिसे देश की व्यवस्था, परिस्थिति, इतिहास की जानकारी नहीं हैं?
           आज नेता बनने की योग्यताएं इस प्रकार हैं :
  1. आप किसी नेता के बेटे हो, बेटे न हो तो कम-से-कम किसी नेता से कोई रिश्तेदारी अवश्य हो।
  2. आप पर आपराधिक आरोप  हो जो साबित न हुए हो।
  3. ईमानदारी से दूर तलक कोई रिश्ता न हो।
  4. आपके पास काफ़ी काला पैसा होना चाहिए ताकि वोट ख़रीदे जा सके।
            उपरोक्त तथ्यों को गलत सिद्ध करने की आवश्यकता हैं, जिससे राजनीति का स्तर उच्च किया जा सके। अगर राजनीति को सही मायने मिले तो चहुमुखी विकास निश्चित हैं। क्योंकि नेता ही वोट के लिए, अपनी कुर्सी के लिए विकास के कार्य करते हैं। मगर भ्रस्टाचार रूपी दीमक राजनीति की जड़ों को सुखा रहा हैं और अगर जड़े मज़बूत करनी हो तो पेड़ को सही खुराक देनी होगी, और वो तब होगा जब हर चुना नेता योग्य, शिक्षित और नैतिक मूल्यों को महत्तव दे। आज के नेता, इंद्र देव के चरित्र से प्रेरित लगते हैं, कितने भी आरोप लगे अपने पद को छोड़ने के लिए तैयार ही नहीं होते, उन्हें अपनी जिम्मेदारी का बोध भी नहीं हैं। जैसे इंद्र को त्रिदेव समय-समय पर सबक सिखाते थे उसी तरह देश की जनता ने भी भ्रष्ट नेताओ को सबक सिखाना चाहिए।
            देश के ‘चुनाव आयोग’ को नेताओं की न्यूनतम योग्यता से संबंधित कोई संशोधन करना चाहिए साथ ही अपराधिक आरोप जैसे मर्डर, रेप के होने पर अयोग्य घोषित किया जाए। आज हमे एक ऐसा ढाँचा चाहिए जो योग्य व्यक्ति को ही सत्ता की पॉवर दे। चुनाव आयोग को, चले आ रहे दकियानुसी सोच कि – ‘कोई भी ऐरा गैरा नेता बन सकता हैं, कोई ईमानदार और योग्य नहीं’ ‘राजनीति गंदी हैं’ को मिटाने की तरफ एक कदम बढ़ाना चाहिए। मेरा अनुरोध हैं सभी दलों के देशभक्त कार्यकर्ताओं से कि वो इस सम्बन्ध में नया संशोधन लाये जिससे कि कोई भी आम आदमी राजनीति में आ सके।
           मेरे अनुसार नेता की योग्यता ऐसी होनी चाहिए :
  1. भारतीय नागरिक हो, बोले तो उसका जन्म भारत में हुआ हो।
  2. उम्र कम से कम 25 साल हो।
  3. उसकी शैक्षिक योग्यता स्नातक हो।
  4. वो ‘राजनीति प्रवेश परीक्षा’ में उत्तीण होना चाहिए।
  5. कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड नहीं हो।
        ऐसा नियम हो कि बिना उपरोक्त योग्यता के किसी को भी कोई भी राजनीतिक दल टिकट नहीं दे सकती। क्यों देश का आईएएस अफसर किसी अनपढ़, भ्रष्ट,बाहुबली व्यक्ति को सलामी दे?
प्रेरणा : आमतौर पर सुनाई देने वाला वाक्य “जानता हैं मैं किस नेता का बेटा हूँ?”

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