वो कूड़ा बीनने वाला ...

वो कूड़ा बीनने वाला …

हाथो कोधोयाथामैनेजिसथैलेकोफेंककर
उसीकूड़ेकेथैलेमेंकुछतलाशरहाथावोदोनो हाथडालकर। 
उम्रकरीबनसोलहसालऔरकदपांचफुटका  
मजबूतकंधोपरझोलाटाँगेतीनफुटका। 
आँखो मेंचमकअँधेराचीरनेवाली 
अपनेअरमानोकोढूंढरहाथाहाथडालकर



दयाभावसेपूछाकोईदूसराकामक्यूँनहींकरते 
गहरीनज़रो सेमुझेदेखवोमुस्कुराया
“साहबकिसीभीकामकेलिएपैसाचाहिए 
नौकरीकेलिएतजुर्बाचाहिएऔरतजुर्बेकेलिएनौकरी;
आदमी ईमानदारहोना चाहिएऔर ईमानदारीसाबितकरनेकेलिएनौकरीचाहिए।
क्याआपनौकरीदेपाओगे ?”

मैसकपकाया, उठतीहीनभावनासेघबराया
अकड़गयीनहींथीमेरी, कुछरुपयेनिकाललाया।
नोटदेखवोबोला, साहबकूड़ेमेंहाथडालकमाताहूँ 
किसीकेआगेहाथनहींफैलाता हूँ।
जमानेमेंबहुतगमहैकंहा तकसाथनिभाओगे
मेरेपीछेदसऔररहेहैं;
क्याआपउनसबको देपाओगे ?

आपकीआँखो में सवालातबहुतहैं
इन्हें भी फेंक दो दिल हल्का हो जायेगा।
मेरे लिए कूड़े से भी बदद्तर  हैं
आप इनके जवाब कभी भी नहीं पा पाओगे 
मेरी टूटी हुई अकड़ सूनी आँखों संग लौटती है 

अब मेरी माँ थैले में कुछ ना कुछ जरुर रखती है
वो रोज सुबह हाथ डाल मेरे घर की तरफ देख मुस्कुराता है।
एक अजीब सी टीस मेरे दिल में उठती है 
ना जाने क्यूँ दिन भर उसकी हंसी मुझे चुभती है



जागो भारत

– विक्रम सिंह तोमर