उल्टी गिनती शुरू … क़यामत.. या.. नयी सुबह – 2013 ..!!

          हमने दिसम्बर 2012 में प्रवेश कर लिया हैं, तो क़यामत की उल्टी गिनती (countdown) भी प्रारंभ हो गयी हैं। आपको तो पता ही हैं 2012 संसार का अन्तिम साल हैं, जीवन की पुनः से शुरुवात होगी, शून्य से प्रारंभ होगा सब कुछ। कई विदेशी धर्म गणनाये (उनमे से एक माया कैलेन्डर) इस बात का समर्थन कर चुकी हैं। कई सभ्यताओं के अनुसार 21-12-12 को कुछ बेहद अनचाहा होगा। मुझे इसके प्रमाण भी नज़र आने लगे हैं। 
           आज भाई भाई को कुछ पैसे के लिए मार रहा हैं, माँ अपने नवजात बच्चे को कूड़ेदान में छोड़ जाती हैं, हर रोज गैंग रेप की ख़बरें आती हैं, बच्चे बड़े होने के बाद अपने बूढ़े माँ-बाप को घर से बेघर कर देते हैं, लोग संस्कारों को छोड़ अस्थायी खुशियों (पैसे) के पीछे भाग रहे हैं, बेगुनाह लोग किसी बम-ब्लास्ट में मारे जाते हैं, लोग धर्म के नाम पे एक-दूसरे से लड़ रहे हैं, दंगे जात-पात के नाम पे हो रहे हैं, मानव बिना स्वार्थ किसी की मदद को तैयार नहीं, परोपकार की भावना दुनिया में नहीं रही; आदर्श, संस्कृति, धर्म के मतलब बदले जा चुके हैं, सत्य हर युद्ध में असत्य से हार रहा हैं; समाज की गन्दगी से गंगा भी काली नाली में परिवर्तित हो चुकी हैं, इंसान का जीवन-काल घट कर 65 साल हो चूका हैं। ये सारे उपरोक्त तथ्य किसी क़यामत से कम नही। क़यामत तो कबसे आ चुकी बस क़यामत का अंत होना बाकी हैं, जो संसार का अंत है। दुनिया अब जीने लायक नहीं रही, इसकी पुनः सफ़ाई ज़रूरी हैं। ऐ क़यामत! अब देर न कर।
           पूरा संसार पानी-पानी हो जाएगा, सब कुछ उसमे डूब के रह जाएगा। और मुझे लगता हैं रब इसके 4-5 टेस्ट परीक्षण भी कर चूका हैं, जैसा कि सुनामी, कटरीना, सैंडी, नीलम ….।। अब आने वाले अंतिम तूफ़ान का नाम हैं ‘क़यामत’ । एक बात मुझे खुजलाने में मजबूर करती हैं कि सारे (ज्यादातर) विध्वंसकारी तूफान के नाम ‘औरत‘ के नाम पर क्यों ? प्रकृति मजबूर हो चुकी हैं क़यामत ढाने को, मानव की आसुरी प्रवृति और हरकतों को देख। और प्रकृति तो ‘देवी पार्वती‘ को माना जाता हैं हिन्दू धर्म अनुसार। लोगो को ज़रुरत हैं तो सिर्फ पहाड़ो में जीवन-यापन करने की, क्योंकि ‘हिमालय’ ही आने वाली नयी सुबह, नयी मानव पीढ़ी का आधार, नए युग का गवाह हैं। चलो, सभी अपने गर्म कपड़े पैक करे, पानी की बोतल की ज़रूरत नहीं हैं क्योंकि सब जगह पानी ही पानी होगा और हिमालय की वादियों में शरण ले। ‘टायटेनिक’ भी नहीं बचा पायेगा आपको इस क़यामत से।
           सबको ये मज़ाक लग रहा होगा, लेकिन मैं चाहता हूँ 31-12-12 को क़यामत आये। बस क़यामत का तरीका ये हो – नए साल से सब मानव आत्म-मंथन करे, अपने चरित्र-निर्माण के पथ पर बढ़े। 2013 की सुबह कुछ अलग हो,हर व्यक्ति का मन स्वच्छ हो। भेद-भाव, इर्ष्या-द्वेश, लाचारी, आसुरता प्रवृति, शोषण का संसार में कोई स्थान न हो। सभी लोग अपने उद्द्येश्य को पाने में सच का साथ दे। क्यों न हम सब मिल अपने संसार को, इस प्रकृति को नया अहसास दे, इस कलयुग को सतयुग में बदलने की थोड़ी सी कोशिश करे? क़यामत संसार में आये न आये क्यों न अपने विचारों में लाये, अपने व्यवहार में लाये? 
             हर युग में मानव ही अपने विनाश का कारण रहा हैं। मानव की गलतियों की पराकाष्ठा ही क़यामत का आगाज़ हैं। क्यों न इस बार 2013 से पिछली गलतियों को सुधारा जाए?
            आओ आज अकेले न जी कर, सब के साथ मिल कर जिए, कुछ इस तरह :
फिक्र मत करो कोई नहीं बचेगा इसीलिए, 
‘यमराज’ जब आये तो कोई उदास न रहे।।

जी लो इतना की कोई आस न रहे,
सामने हो ‘अमृत’ पर पीने की प्यास न रहे।।
प्रेरणा : Happy New Year !!

You May Also Like