राम राम जपना, पराया माल अपना

राम राम जपना, पराया माल अपना

                     लगता हैं सरकार का मूल मंत्र जनता का पैसा, अपनी व्यक्तिगत लाभों में लगाना हैं। सत्ता में आने पर हर दल जनता के पैसे का दुरूपयोग करता हैं। आम आदमी इससे बेखबर रहता यदि अरविन्द केजरीवाल, सुब्रमण्यम स्वामी जैसे जागरूक लोग राजनीति में हो रहे घोटालो को बेनकाब करने का बेडा न उठाते।

                     राजनीति का एक दाँव-पेच ये होता हे की अपनी गलतियों को उजागर करने वाली ताकतों को अपने साथ मिला लिया जाए। अब वो तरीका कैसा भी हो सकता हे क़ानूनी और गैर-क़ानूनी। हर सरकार दागी नेताओ को बचाती हे क्यों ताकि वो और उनके नेतागण उनका साथ दे, मुलायम या लालू न जाने ऐसे कितने दागी नेता हे? आज हर एक पार्टी एक दूसरे से  मीडिया के सामने लडती हैं पर सच ये हैं की सभी रात के अँधेरे की तरह एक ही हैं।

                     आज आप ये नहीं कह सकते की कांग्रेस, एक लोन कंपनी हैं या घोटाला-निर्माण मशीन या गाँधी परिवार की जागीर। प्रतिभा पाटिल ने करोडो रूपये व्यर्थ ही विदेश दौरों में खर्च कर दिए, सोनिया भी राजनीतिक सेवा का दुरूपयोग समय समय पर करती रही हैं।

                     हाल ही का वाक्या देखिये, जनता पार्टी के नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सबूतों के साथ कांग्रेस पर ये आरोप लगाया कि राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी की कंपनी ‘यंग इंडिया’ ने एसोसिएटेड जर्नल्स को 50 लाख रूपये में ख़रीदा, जबकि खरीदे अख़बार के पास 1600 करोड़ की संपत्ति हैं। सवाल ये उठता हे की 50 लाख में आप 1600 करोड़ की संपत्ति कैसे खरीद सकते हो? इसके अतिरिक्त कांग्रेस ने घाटे में चल रही एसोसिएटेड जर्नल्स कम्पनी को 90 करोड़ का क़र्ज़ वो भी ब्याज-मुक्त दिया? तो ऐसा क्यों? इस तरह का क़र्ज़ गैरकानूनी हैं क्योंकि कोई भी राजनीतिक दल व्यवसायिक काम के लिए लोन नहीं दे सकती। और तो और राहुल गाँधी ने यंग इंडिया कम्पनी में हिस्सेदारी की बात भी छुपायी। इस तरह उन्होंने चुनाव आयोग के नियमो की दज्ज़िया उड़ाई।

                      कांग्रेस पहले इन आरोपों पर जवाब देने से मना कर रही थी और अदालत में जाने की धमकी दे रही थी, पर जब कांग्रेस ने क़र्ज़ देने की बात मानी और कहा इसमें उनका कोई व्यवसायिक लाभ नहीं हैं। इस तरह के जवाब कुछ हज़म नहीं हो रहे हैं बिना स्वार्थ के आज कोई कुत्ते भी नहीं पालता। सुब्रमण्यम स्वामी ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कर कांग्रेस की मान्यता रद्द करने की मांग उठाई थी। पर सब  जानते हैं कि क्या हुआ ?

                      आज देश में ऐसी कोई संस्था नहीं जो बिना दबाव के निष्पक्ष तरीके से सरकार द्वारा हो रहे आरोपों पर कोई निर्णय ले सके। सीएजी के रिपोर्ट देने के बाद भी क्या जांच की ज़रूरत रहती हैं, पर अभी तक काल ब्लॉक आवन्टन घोटाले का परिणाम सामने नहीं आया हैं।

                     यदि आप ये चाहते हैं कि दागी नेताओ के खिलाफ वास्तव में क़ानूनी कार्यवाही हो, घोटालो के आरोपियों को सजा हो और उनकी काली कमाई जब्त हो, राजनेताओ को शक्ति के दुरूपयोग का डर हो, तो देश में कोई सर्वोच्च शक्ति होनी जाहिए, जो व्यक्ति-विशेष नहीं होकर समूह पर आधारित हो। क्या अन्ना, केजरीवाल का स्वायत्त संस्था के रूप में जनलोकपल निर्माण की मांग करना अनुचित हैं?

                     क्या आपको नहीं लगता हर राजनीतिक पार्टी का सन्देश इस प्रकार हैं:

                   राम राम जपना, पराया माल अपना।
                   5 साल की खुली छूट, मिलकर रहना।
                   कोई जाँच कभी नहीं, इसलिए न डरना ।
                   लूटो आराम से भोली और भुलक्कड़ जनता ।।

प्रेरणा : कांग्रेस के हर छेत्र में किये घोटाले।