मैं हूँ आम आदमी

                        अरविन्द केजरीवाल एक ऐसा नाम हे जो भ्रस्टाचार के खिलाफ आम आदमियों की लड़ाई लड़ रहा हैं। अरविन्द आज के क्रांतिकारी हैं जो राजनीति की खामियों को दूर कर युवाओ को राजनीति में आने के लिए प्रेरित करते हे किन्तु इस शर्त के साथ की आपका ध्येय लोकहित हो और आप अपने दायित्व का पूरी ईमानदारी के साथ निर्वाह करे। मेरी नजरो में हर वो व्यक्ति क्रांतिकारी हैं जो अन्याय के विरुद्ध व्यक्तिगत लडाई नहीं देशहित के लिए पूरे समाज के उद्धार के लिए खड़ा होता हैं।

                        अगर आप अरविन्द केजरीवाल का अभी तक का जीवन देखेंगे तो आप उन्हें अपना आदर्श बनाने के लिए विवश हो जाओगे। पहले अरविन्द जनलोकपाल बिल को लाने के लिए अन्ना के साथ  भ्रस्टाचार के विरुद्ध लड़ रहे थे। पर उन्हें जब नेताओ से धोखे पे धोखे मिले तो वो समझ गए की कोई भी नेता जनलोकपाल बिल पारित नहीं होने देंगे, और राजनीति के कुरुछेत्र में उतरे बिना भ्रस्टाचारियो को नंगा किया भी नहीं जा सकता। मैं पूरी तरह से अरविन्द केजरीवाल का समर्थन करता हूँ।

                        अगर अन्ना आन्दोलन कर राजनीति से दूर रह कर आम आदमियों के लिए लड़ते हे तो वो एक नरम दल की श्रेणी में आते हैं। आप ही कहिये क्या हम आजादी के लिए पूर्ण श्रेय करमचंद गाँधी को देते हे? नहीं !! आजादी दिलाने में भगत सिंह, चंद्रशेखर, राजगुरु, सुभाष चन्द्र बोस आदि का भी बहुत महत्तवपूर्ण योगदान रहा। अरविन्द केजरीवाल ने उनकी क्रांति की राह चुनी और गरम दल बना कर लड़ना चाहते हैं, इसमें कुछ गलत क्या हैं? गांधी ने भी कभी गरम दल का साथ नहीं दिया और यही गलती अन्ना कर रहे हैं!!

                        केजरीवाल ने “पोल खोल नीति” से अपनी राजनितिक पारी प्रारंभ की। यही विरोधी पक्ष का कार्य हैं कि सत्ता में बैठे लोगो पर नज़र रखी जाय और कुछ भी गलत लगे या समाज के दृष्टी-कोण से उचित न हो तो उसके विरुद्ध आवाज उठाये।अभी तक अरविन्द ने इनका असली चेहरा जनता के सामने रखा हैं :

1) रोबर्ट वाड्रा और डीलफ: सरकार, डीलफ की एजेंट । क्यों 65 करोड़ का लोन बिना ब्याज ?

2) सलमान खुर्शीद: जाकिर हुसैन ट्रस्ट द्वारा 81 लाख का बंदरबांट। विकलांग कल्याण शिविर के नाम पर धोखा !!

3) नितिन गडकरी: 70 हज़ार करोड़ रूपये खर्च होने के बाद भी विदर्भ में किसान क्यों आत्महत्या कर रहे ? गडकरी ने अनैतिक तरीके से किसानो की जमीन और पानी लिया ?

4) रिलायंस इंडस्ट्री: मनमाने तरीके से महंगी गैस बेची जा रही हे। क्या कांग्रेस इनकी दुकान हे ?
और न जाने कितने इस गिनती में आने वाले हैं। ये सभी घोटाले महँगाई बढाने में घी का काम कर रहे हैं।
               
                       हर पार्टी का हर एक नेता अरविन्द के नाम पर डरने लगा हे कंही अब उन पर “पोल खोल नीति” की गाड़ी न टकरा जाए और फिर बचने के लिए दौड़ना पड़े। किन्तु नेता भी अरविन्द के इस कदम की सराहना कर रही हैं तभी वो इसे “हिट” और “रन” कह रही हें।
                       क्या अरविन्द अपने नौकरी के मेहनतनामा से आराम से जीवनयापन नहीं कर पाते? बड़े आराम से न !! तो फिर क्यों कई लोग उन पर ऊँगली उठा रहे हैं? आज समस्या यही हे की कोई अच्छा कार्य करे तो ऊँगली पहले ही उठ जाती हैं। हमारे पुराण गवाह हे कि कार्तिकेय के तारकासुर का वध करने के बाद, इंद्र भी अपनी सत्ता के प्रति शंकित हो गए थे और कार्तिकेय के विरुद्ध बोल रहे थे। 
                     आज अरविन्द का जुझारू रूप देख दीवाली मनाना सार्थक लगता हैं, इस उम्मीद में की राजनीति का आने वाल भविष्य सुन्दर और भ्रस्टाचार-मुक्त हे। पर क्या आम आदमी ऐसा होने में अपनी भूमिका अदा करेगा ? मुलायम ने यंहा तक कहाँ की “वो आरोप लगाते लगाते खुद थक कर चुप हो जायेंगे“। अब देखना ये हे की क्या ऐसा होगा? 
प्रेरणा : अरविन्द केजरीवाल

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