बापू , आदर्श हमारा नही हो सकता तू कभी भी

बापू तूने जो दिया अहिंसा का मंत्र,
उससे नही हो पाता कभी भारत स्वतंत्र।
सत्याग्रह और गांधीवाद सब हैं बेकार,
 भीख में तो कभी न मिलता, हमे तो छीनना ही था अपना जन्मसिद्ध अधिकार ।।1।।

एक गाल पे लगे चांटा, तो बढाओ दूसरा गाल,
नरम दल के इस सोच का क्या था आधार।
ऐसे में तो हम तोड़ न पाते कभी परतंत्रता का जाल,
शोषण सहने वाला भी होता है शोषण का ज़िम्मेदार ।।2।।

हम बन्दूक ना उठाएंगे,
चाहे फिरंगियों की गोलियां खायेंगे।
अगर हम ऐसी कायरता दिखाते,
तो क्या अँगरेज़ हमे आज़ादी भीख में दे जाते ??3??

क्रांतिकारियों ने तहलका मचा दिया,
अंग्रेजी तख़्त को हिला दिया।
जो तेरा आदर्श 100 साल में न कर पाया,
उस अँगरेज़ को पल में पानी पिला दिया।।4।।

अँगरेज़ दमन चक्र चलाते रहे,
लोगों को गरीब, विधवा बनाते रहे।
पर ऐ राष्ट्रपिता! तू उनके आंसूओं पर अपना गीत गाता रहा,
भारत के आक्रोश को ठंडक पहुचाता रहा।।5।।

उन वीरों को भी प्यारी थी अपनी जान,
जो हुए देश पर कुर्बान।
वो भी कर सकते थे क्रांति का अपमान,
महफूज रख सकते थे अपनी जान।।6।।

तेरे नेतृत्व , तेरे सादगी पर तो हम भी है फिदा,
पर ये क्या पागलपन था ऐ राष्ट्रपिता।
फिरंगी तो आज तक हमे सताते,
अगर हम अहिंसा का अस्त्र लिए उन्हें न भगाते।।7।।

तूने की गद्दारी देश से हर पल,
न था तू अपने निर्णय में अटल।।
अहिंसा का मंत्र ले जब हज़ारों को तूने किया बेघर, बेसहारा,
तो फिर क्यों लगाया तूने ‘करो या मरो’ का हिंसक नारा।।8।।

भारतीयों का तू था पथ प्रदर्शक,
तूने किया हमे संगठित, था तू अच्छा मार्ग-दर्शक।
मगर तेरी लाठी पकड़, हम मंजिल को न छू पाते,
हम परतंत्रता का कलंक भारत के माथे से न मिटा पाते।।9।।

तुझे भले ही अभिनेता माने भारत का स्वर्णीम इतिहास,
मगर तूने तोड़ा  भारत के नागरिकों का विश्वास।
एक व्यापारी को शासक बनने का मौका दिया तुम्हारे आदर्शों ने ही,
तेरा व्यक्तित्व अच्छा था, पर आदर्श हमारा नही हो सकता तू कभी भी।।10।।

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