पैसें का बरगद

पैसें का बरगद

                एक नेता अपने संतानों की खर्च करने की आदत से परेशान था | आज उसने बड़ी हिम्मत कर अपनी संतानों को बुलाकर समझाते हुए कहा “बेटा, पैसे पेड़ पे नहीं उगते | इसे मेहनत कर कमाया जाता हें |
इसीलिए सोच समझकर खर्च किया करो |”

                 नेता की संताने फेसबुक युग में रहते थे उन्हें पता था बाजारों में पैसों का चलन नहीं रहा, रुपयों का ज़माना  हें | और डैड ने कभी पैसे कमाए ही नहीं, आम जनता के पैसे घोटाले कर कर लूटे हें | कभी चाय घोटाला तो कभी लैपटॉप घोटाला |

             अपनी बाप की बाते सुन उनसे न रह गया और मजाक बनाते हुए बोले “डैड , डू नोट टॉक नोंसेंसे | हमे भी आपकी तरह नेता बनना हें और हमें पता हें पैसे कैसे उगते हें, पैसे का बरगद किधर हें और उसे कैसे ..लुटा जाता हें.. ओह आय मीन… तोडा जाता हें | “

                                   नेताओ के  लिए पैसे भ्रस्टाचार रूपी बरगद के पेड़ पे उगते हें ||
                                   आम आदमी के लिए पैसे माथे पर आये पसीने से सींचते हैं ||
                                   अमीरों के लिए पैसे बैंक में फिक्स्ड डेपोजीत द्वारा बढते हैं ||

            नेता अपने संतानों की बाते सुन ग़मगीन हो गया और बोला  “बेटा, तेरी माँ तिहाड़ जेल में पहले ही चक्की पीस रही हैं, मेरा नंबर आने को हो|  मैं तो जेल चला जाऊंगा पर पूरा परिवार एक साथ जीवन जेल में बिताये इससे बुरा एक आदमी के लिए क्या होगा ? मेहनत करो, जनता का पैसा लूटना बुरी आदत हें | जन लोकपाल बिल आने वाला हें , तुम ऐसी गलती न करना जो मैंने की || “

              तभी जन लोकपाल का ज़िक्र  आते ही नेता की नींद टूट पड़ी | परन्तु नेता सपने में अपने संतानों की होशयारी देख काफी खुश था ||

प्रेरणा : प्रधानमंत्री के एक सन्देश “पैसें पेड़ पे नहीं उगते ” पर आधारित । शायद प्रधानमंत्री इस सन्देश से भोले  भाले अपने बच्चो को समझा रहे थे । बच्चो ने शर्त रख दी – “टीवी पे  सबके सामने समझाओ तो माने” ।।