तेरी शिक्षा, हमारा घोषणा-पत्र

                मध्यवर्गीय माँ-बाप बच्चो के स्कूलों और कॉलेजो में बढती फीस से परेशान हैं। अगर विद्यालय, संस्थान  प्राइवेट हो तो कहने ही क्या? अब तो देश के सर्वोच्च संस्थान आई.आई.टी. में भी 80% शिक्षा शुल्क बढने वाला  हैं।

                आज जब मैं आई.आई.टी. की अपनी दोस्त से मिला और मैंने इस बारे में चर्चा की तो जो मुझे पता लगा वो बेहद आश्चर्य-जनक था। उसने मुझे बताया की ये 2014 में होने वाले चुनावों की वजह से हो रहा हैं। सरकार चाहती हैं की स्कूलों/कॉलेजों की फीस इतनी बढ़ा दी जाए की हर मध्यवर्गीय परिवार क़र्ज लेने पे मजबूर हो जाए। 
                जब मैंने उससे पूछा की क़र्ज़ लेने से सरकार को क्या फायदा होने वाला हे? तो उसने बताया की देखो उद्योगपति और अमीर जनता तो पहले से ही सरकार के पक्ष में वोट देती हैं, क्योंकि सरकार ने आज तक इन्हें ही खुश रखा हैं। अमीर तबके को क्या आज तक देश की समस्या जैसे महंगाई, भ्रस्टाचार से फ़र्क पड़ा हैं? अब सरकार चाहती हैं की मध्यवर्गीय और गरीब जनता के वोट को अपनी तरफ खीचने के लिए उन्हें कैसे विवश किया जाए?
                मेरे पूछने पर की सरकार को अचानक ऐसा ख्याल क्यों आया की मध्यवर्गीय और गरीब जनता के वोटो की तरफ भी देखा जाए? वो बोली “अरे देखो! अरविन्द पार्टी ने नयी पार्टी बना ली हैं और अन्ना भी अपनी देश यात्रा पर आम जनता को जागरूक बनाने निकलने वाले हैं। तो ऐसे में उन्हें अपने पक्ष में करना समय की मांग हैं। सरकार की योजना हैं की वो अपने घोषणा-पत्र में शिक्षा के लिए ब्याज़-मुक्त क़र्ज़ देने का प्रस्ताव रखेगी और इस तरह शिक्षा की पैरवी भी हो जायेगी।”
                 मैं बोल पड़ा “पिछले महीनो की घटनाओ को देखकर तो यही लगता हें की कांग्रेस ब्याज़-मुक्त क़र्ज़ देती ही रही हैं अब बस पोल खोलने के बाद उसे सार्वजनिक करना चाहती हैं।”
                 वो आगे बताने लगी की जब आम आदमी कांग्रेस से क़र्ज़ लेगी तो उसमे एक शर्त ये होगी की आप कांग्रेस के किसी भी कार्य पर आवाज नहीं उठायेगे और अन्ना, रामदेव, केजरीवाल इत्यादि किसी के भी किसी भी काम में उनका सहयोग नहीं करेंगे।आपको हर सूरत में 10 साल के बीच क़र्ज़ चुकाना होगा।और यदि हमारी सरकार न रहे तब आपका कर्ज़ 10% ब्याज में बदल जाएगा। 
                 “तो ये सब कंडीशन ऐप्लाई (*) में होगा !!”
                  उसने हां में सर हिलाते हुए कहा की इस तरह कांग्रेस आम आदमी को दबाना चाहती हैं।
                  अब आप कहेंगे की मैं नहीं मानता तो मैं बता दूँ मेरी दोस्त नेता की बेटी हैं और उन्ही के घर में कुछ नेता मीटिंग के  मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे। अब आप नाम मत पूछना। तो क्या आप ऐसा  ब्याज़-मुक्त क़र्ज़ लेने के लिए आवेदन पत्र लेना चाहेंगे?  बस थोडा इंतज़ार कीजिये ।।
             
                  ब्याज-सहित या ब्याज-मुक्त क़र्ज़? आपके फैसले का इंतज़ार रहेगा !!
प्रेरणा : मेरी दोस्त ‘कल्पना’

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