चलो अब आज अपने हिन्द की जैकार करते है

चलो अब आज अपने हिन्द की जैकार करते है

 लेखक – अभिषेक कुमार पाठक 
चलोअबआजचलतेहैंनसो मेंबिजलियाँ  लेकर,
चलोअबआजअपनेहिन्दकीजैकार करतेहै। 
अँधेराहैं, हमेंमालूमहैंमगरमालूम यहभीहै
अँधेराटिकनहींसकतादहकतेसूर्यकेआगे।
अगरवोहआसमानवाला छिपा  हैकालेकोहरेमें 
चलोअबआंखसेहमआगकीबौछारकरतेहैं।
चलोअबआजचलतेहैनसो मेंबिजलियाँ  लेकर 
चलोअबआजअपनेहिन्दकीजैकार करतेहै।

अनादिलबाग मेंगायें, कीकूकेंकोयलेंफिरसे,
कीफिरगलियो मेंगूंजेबचोकीकिलकारी,
मिटातेहैचलोमिलकरदिलोसेखौफलोगो के,
चलोअबचीरकरदहशतजराउसपरचलतेहै।
चलोअबआजचलतेहैनसोंमेंबिजलियाँ  लेकर,
चलोअबआजअपनेहिन्दकीजैकार करतेहै।
कोईक्यूँरहेभूखाकटेक्यूँरातराहो में,
कीकोईक्यूँकिसीकेसामने  यूँहाँथफैलाये,
मिटाते  हैचलोमिलकरगरीबी  इसधर्तलसे,
चलोअबमिलकेहमउद्गोश्मय हुनकरकरतेहै।
चलोअबचलतेहैनसो मेंबिजलियाँ  लेकर,
चलोअबआजअपनेहिन्दकीजैकारकरतेहै।
किताबें  मंदिरो कीखोलखुलेमस्जिदकेदरभीअब,
खुदाऔररामदोनो मेंखुलकरबातहोजाएअब।
इधरहमभीगलेलगलेभुलामजहबकोमुल्लाको
चलोअब भाईचारेकाशुरूसंसारकरतेहै।
चलोअबचलतेहैनसो मेंबिजलियाँलेकर,
चलोअबआईअपनेहिन्दकीजैकारकरतेहै।

– अभिषेक कुमार पाठक