बेन्जामिन के भारतीय दोस्त

बेन्जामिन के भारतीय दोस्त

‘बेन’, हमारा मित्र एक सफल नौकरीपेशा।
प्रेमरोगी, जब क्लाइंट मीटिंग में छोकरी देखा।
मॉलो में दोनों को फिर दुनिया ने देखा।
परिवर्तन आया फिर उसमे ऐसा।
उधारी मांगने लगा हमसे पैसा।
वो बेन की भावनाओ से खेल रही थी।

समझाया,पर बेन को दोस्तों की बाते बोर कर रही थी।

दोस्ती के वास्ते हमने फिर यूँ अनशन किया,
“बेन छोड़, बेन छोड़, बेन छोड़ !!”
ब्रेक-उप कर उससे बिना सोच ।।1।।

अन्धा हुआ प्यार, झूठा कहा हमे।
छोड़ा उसके लिए दोस्तों को उसने,
शराबी, जब सच का सामना हुआ,
घायल, जब पीके पेड़ से दुर्घटना हुआ,
आसुओं की सुखी धार गालो पे दिख रही थी,
दिल टूटा था पर दोस्तों को देख हसी छूट रही थी।
एक चंगुल से निकला और अब दारू जकड़ रही थी।

दोस्ती के वास्ते हमने फिर यूँ अनशन किया,
“बेन छोड़, बेन छोड़, बेन छोड़ !!”
आज ही अपनी पीने की जिद छोड़ ।।2।।

पहले प्यार का गम जीना भुला देता हैं।
मेह के प्यालो को जिंदगी बना देता हैं।
जिंदगी का अनुभव ये भी सिखा देता हें,
कि पहले प्यार का गम दूसरा मिटा देता हैं।
बेन के दिल की घंटी बजने में लगा एक महीना।
पता चला रोज हॉस्पिटल मिलने आती थी ‘जीना’।
मरती थी उस पर चाहे हो कितना भी कमीना।

दोस्ती के वास्ते हमने फिर यूँ अनशन किया,
“बेन छोड़, बेन छोड़, बेन छोड़ !!”
जीना हैं सामने दिल की बात बोल।।3।।

इस तरह पहली बार दोस्तों का अनशन सफल हुआ !!

प्रेरणा : एक अपशब्द!!