तुम कौन हो ?

तुम कौन हो ?

आशिकों का प्यार तुम हो ,

मौसम की बहार तुम हो ,
रातों का अन्धकार तुम हो ,
दर्द की पुकार तुम हो 
कभी ‘सुपर’ तो कभी ‘सुपरनैचुरल’ तुम हो ।।1।।
हम-तुम की तुम तुम हो,
भगवान् का प्रश्न तुम हो ,
महाभारत की वजह तुम हो , 
आँखों की नमी तुम हो ,
कभी ‘सीता’ तो कभी ‘सनी’ तुम हो ।।2।।
ममता की मूरत तुम हो ,
ख़ुशी परिवार की सूरत तुम हो ,
माँ-बेटे को जुदा करने की वजह तुम हो ,
ज़िन्दगी का हर जादू तुम हो ,
कभी ‘पानी’ तो कभी ‘दारू’ तुम हो ।।3।।
शोर की आवाज तुम हो ,
सदियों की प्यास तुम हो ,
चिठ्ठीयों का अनोखा अहसास तुम हो,
कलयुग का काल तुम हो ,
कभी ‘नरक की हेड’ तो कभी ‘स्वर्ग का बाईपास’ तुम हो ।।4।।

प्रेरणा : तुम्हारा पल-पल बदलता रंग ।